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जहॉं भी जाएंगे, खुशियॉं ही पायेंगे

सरस्वती उ.मा. विद्यालय सिंगरौली में आयोजित हुआ दीक्षांत समारोह

सिंगरौली। ‘जहॉं भी जाएंगे, खुशियॉं ही पायेंगे’ की शुभकामना के साथ सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगरौली (सरस्वती शिशु मंदिर) के सभागार में कक्षा 11 वीं द्वारा कक्षा द्वादश के भैया बहिनों की विदाई के लिये दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। शनिवार को अपरान्ह 2 बजे से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार जायसवाल, व्यवस्थापक विनोद गोयल, कोषाध्यक्ष यदुवीर यादव, सदस्य डी.एल. रायकवार, वरिष्ठ व्याख्याता प्रेमजीत मिश्र एवं विद्वत् परिषद के सचिव, पत्रकार रोहित गुप्त अतिथियों के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य फतेह बहादुर त्रिपाठी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मॉं सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया। ब्रह्मनाद् के उपरांत कक्षा 11 वीं ‘ब’ की छात्रा स्वाति तिवारी ने कार्यक्रम के विषय में बताते हुए अतिथियों का स्वागत अपने अभिभाषण से किया। इस अवसर पर कक्षा 12 वीं के भैया बहिनों आकांक्षा सिंह, तनुप्रिया बैस, पुनीत सिंह बैस, रितिक चौधरी एवं पीयूष तिवारी ने विद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। तत्पश्चात कक्षा 11 वीं की मुस्कान गुप्ता एवं निधि मिश्रा ने अपने उद्बोधन से विदा होने वाले कक्षा द्वादश के भैया बहिनों को उनके भावी जीवन के लिये शुभकामनाएं प्रेषित कीं। समारोह के अंतर्गत कक्षा एकादश द्वारा द्वादश के भैया बहिनों के लिये मनोरंजक खेल का आयोजन भी किया गया था।
उद्बोधन के क्रम में भैया बहिनों को संबोधित करते हुए विद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता गणित बुद्धसेन मिश्र ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिगत परीक्षार्थियों को अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्स दिये एवं उन्हें समय प्रबंधन के बारे में बताया। अपने उद्बोधन में प्राचार्य श्री त्रिपाठी ने बताया कि विद्या भारती अपने छात्र छात्राओं की विदाई नहीं करता। उन्होंने बताया कि हमारे ऋषि मुनियों ने मानव जीवन को चार वर्गों में विभाजित किया है। जन्म से 25 वर्ष का समय ब्रह्मचर्य आश्रम का है। सभी सांसारिक विषयों से दूर रहने तथा धैर्यपूर्वक ज्ञान विज्ञान कला कौशल को अर्जित कर अपने भावी जीवन को संवारने के लिये यह कालखण्ड है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती गुरुकुल परम्परा के अनुसार ही अपने विद्यालयों में शिक्षित भैया बहिनों के लिये दीक्षांत समारोह का आयोजन करता है। आज विदा नहीं किया जा रहा है आप सभी भविष्य में भी पूर्व छात्र के रूप में विद्यालय से जुड़े रहेंगे।
समारोह को संबोधित करते हुए कोषाध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि आपकी विदाई नहीं हो रही है। यह आपके सम्मान का समारोह है। सरस्वती विद्यालयों में शिक्षा के साथ ही संस्कार भी दिये जाते हैं। उन्होंने शुभकामना देते हुए कहा कि देश सेवा के कार्य में सदैव आगे रहें और अपने माता पिता के नाम को रोशन करें। सदस्य डी.एल. रायकवार ने इस अवसर पर कहा कि स्वयं पर विश्वास रखें। सकारात्मक सोच के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे आपके जीवन में कभी तनाव नहीं आएगा और आापको अपना लक्ष्य साधने में सहायक होगा।
विद्वत् परिषद के सचिव पत्रकार रोहित गुप्त ने लघु प्रसंगों एवं कथाओं के द्वारा भैया बहिनों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने अनुशासित जीवनचर्या, कठोर परीश्रम एवं धैर्य से संकलित ज्ञान के प्रकाश को दिग्दिगांत में प्रकाशित करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि आप किसी दूसरे को अपना प्रतिस्पर्धी नहीं मानें, स्वयं से ही आपकी प्रतिस्पर्धा है यह मानकर चलें और नित्य प्रति अपनी गुणवत्ता में निखार लाते रहें। श्री गुप्त ने सावधान करते हुए कहा कि अब से लेकर परीक्षा पूर्ण होने तक बाहर के आहार व जंक फूड के सेवन से बचें, क्योंकि अस्वस्थ हो जाने से आपका परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकता है। कक्षा द्वादश के भैया बहिनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप में से कई अपने माता पिता से दूर पढ़ने के लिये जायेंगे। वहॉं अपने हित और लक्ष्य की पूर्ति के लिये आपको स्वयं ही त्वरित निर्णय लेने पड़ेंगे। ऐसे में आपको यह बताना नितांत जरूरी है कि मित्र किसे समझें। उन्होंने बताया कि आपकी प्रसंशा करने वाला स्वाभाविक रूप से आपको प्रिय और सच्चा मित्र लगने लगेगा। लेकिन ऐसा कत्तई नहीं है। ऐसे लोगों से सावधान रहकर उनका परीक्षण करते रहें। उन्होंने बताया कि माता पिता एवं गुरुजनों के अलावा कोई भी सच्चा मित्र नहीं हो सकता क्योंकि ये लोग निःस्वार्थ आपकी कुशलता, सफलता, प्रगति एवं उन्नति के अभिलाषी होते हैं।
विद्यालय के व्यवस्थापक विनोद गोयल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह खुशी एवं दुःख का पल है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल से विदा होने के प्रसंग को उद्धृत करते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण अपने सखा सुदामा जी को और अपने गुरु को नहीं भूले, आशा करता हॅूं कि उसी प्रकार आप सभी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद अपने गुरुजनों को नहीं भुलाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य पर जन्म भूमि, माता पिता एवं गुरुजनों का ऋण रहता है। विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार जायसवाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि द्वादश के भैया बहिनों के लिये यह टर्निंग प्वांइट है। आप सभी अपने लक्ष्य को निर्धारित कर अपनी दिनचर्या एवं कर्मों को तय करें। उन्होंने अपने मार्गदर्शन में कहा कि आपने यदि अपने आगामी 4-5 वर्ष को ठीक से संभाल लिया तो आपका भावी 40-50 वर्ष संवर जायेगा। भारत विश्व गुरु बने, सोने की चिडिया फिर से बने इस हेतु प्रयत्नशील रहेंगे, ऐसी अपेक्षा है।
यह समारोह वरि. व्याख्याता हिन्दी सोमेश्वर सिंह की देखरेख में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपहार वितरण के बाद कक्षा एकादश की बहिनों पूर्णिमा मिश्रा, कीर्ति मिश्रा, स्वाती तिवारी, काजल एवं दीपा द्वारा भावपूर्ण विदाई गीत प्रस्तुत किया गया तथा भैया इंद्रकमल पटेल ने अपनी कविता द्वारा शुभकामना व्यक्त किया। अवसर पर प्रधानाचार्य प्रभाकर प्रसाद मिश्र, आचार्य ओमप्रकाश पाण्डेय, संगीताचार्य श्याम सुंदर वर्मा, क्रीड़ाचार्य गुलाब सिंह सहित अन्य आचार्य दीदियों की उल्लेखनीय उपस्थिति थी। समारोह का समापन सामूहिक स्वस्ति वाचन से हुआ।
फोटोः 2 (दीक्षांत समारोह)

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