तकरार के बाद आदित्य मोहन और रतन राहा की ‘ना जाने दिल कहां खो गया’

मुंबई| मिस्टर बिहार आदित्य मोहन ने जिस बेहतरीन अंदाज़ में  फिल्म निर्देशक रतन राहा की फिल्म तकरार में  काम किया है, उसकी तारीफ करते निर्देशक साहेब थकते नहीं हैं। आदित्य मोहन भी कहते हैं कि मैं जिस तरीके का किरदार काफी दिन से मैं करना चाहता था, उसी में से एक है हमारी फिल्म ‘तकरार’।  इस फिल्म में आप मुझे एक एंग्री यंगमैन के रूप में देखेंगे।  मेरे ज़बरदस्त एक्शन के साथ ही पहली बार मेरे किस सीन का भी आनंद लेंगे और ये सब संभव हुआ निर्देशक रतन राहा की वजह से।  जो सेट पर काफी कूल  रहते हैं और अपने कलाकारों से हँसते खेलते हुए काम करा लेते हैं। अब तकरार के पोस्ट प्रोडक्शन खत्म होने के बाद कोरोना संकट की घड़ी में निर्देशक रतन राहा ने मि.बिहार को अपनी नई भोजपुरी फिल्म ‘ना जाने दिल कहां खो गया’ के लिए अनुबंधित किया है। देश में फैली वैश्विक महामारी कोरोना संकट के दौरान नई फ़िल्म के लिए बतौर हीरो अनुबंधित होने पर आदित्य मोहन ने तहेदिल से धन्यवाद दिया है और ये भी कहा कि मैं इस फिल्म का साइनिग अमाउंट जहाँ फंसा हुआ हूँ। इस कोरोना के संकट काल में वहां के लोकल लोगों पर खर्च करूँगा और कोशिश करूँगा इन लोगो के कुछ काम आ सकूँ।  केंद्रीय भूमिका में मिस्टर बिहार रह चुके हैंडसम हीरो आदित्य मोहन इस फिल्म में काफी अलग लुक में नजर आने वाले हैं। उनका किरदार बहुत ही पॉवरफुल है। फिल्म की शूटिंग लॉक डाउन पूरी तरह से खत्म होने पर सुरक्षा को ध्यान में रखकर गाईड लाईन के तहत शुरू की जाएगी। चन्द्रवर्षा एंटरटेनमेंट बैनर तले निर्मित की जाने वाली इस फिल्म ना जाने दिल कहां खो गया के निर्माता चन्द्रेश मेहता हैं। फिल्म के निर्देशन की कुशल बागडोर निर्देशक रतन राहा ने संभाला है। लेखक अनिल विश्वकर्मा हैं। संगीतकार अमन श्लोक हैं। फिल्म की अन्य जानकारी शीघ्र ही दी जायेगी।

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