मजमाकार कमल काबुलीवाला ने जमाया रंग

कमल काबुलीवाला और सपेरे लगा रहे हैं मजमा और मना रहे हैं जष्न, जश्न गंगा नदी का। जी हाँ गंगा नदी के उद्गम, जन्म,
और बॉलीवुड से इसके रिश्तों को दर्शा रहे हैं बीन, तुम्बे और ढोल की धुनों पर ।
जशनेगांगा मनाता है जश्न विश्व की सबसे नदी का। धर्म, आस्था विज्ञान, सवाल जवाब, हास्य व्यंग्य, बातचीत और नाच का
मजमा। मजमाकार कमल काबुलीवाला से एक बातचीत, एक साक्षात्कार ।

सपेरों को गंगा नदी से से जोड़ कर देखने का ख़याल और मक़सद क्या है ?

गंगा एक महानदी है और एक नदी को सिर्फ पानी से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता। गंगा एक विचारधारा है।
कइयों के लिए गंगा का महत्त्व धार्मिक तौर से जुड़ा हुआ है और कइयों के लिए ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक अजूबा
है। जिस तरह से भारत को गंगा नदी का देश कहा जाता है उसी तरह से सपेरों का देश कह कर भी बुलाया जाता है
इसीलिए देश की दोनों पहचानो को साथ में लेकर चलना और देखना एक स्वाभाविक सी सोच थी ।

किस तरह से जश्न मनाया जा रहा है जशनेगांगा में ?

मजमा का मतलब ही आनंद है। मजमे के ज़रिये अगर दर्शकों से कोई ज्ञान की बात भी करनी होगी तो वो हंसी
मज़ाक में ही की जाएगी ।

जशनेगंगा के ज़रिये आपने अपने मजमे में गंगा नदी को किन बॉलीवुड के तारों के साथ जोड़ने और बुनने की कोशिश
की है ?

बॉलीवुड के साथ जोड़ मेल बिठाने की ज़रूरत नहीं पड़ी। गंगा नदी का रिश्ता बॉलीवुड के साथ बहुत पुराना है।
हमें बस इस रिश्ते की गांठे ढूंढनी थी और जनता को एक सिलसिलेवार तरीके से पिरोकर दिखानी थी। बहुत से
फ़िल्मी गाने जैसे "राम तेरी गंगा मैली हो गयी ", "ओहरे ताल मिले नदी के जल में नदी मिले सागर में " काफी
मशहूर रहे हैं। बहुत से गानो का फिल्मीकरण गंगा नदी किनारे किया गया है। यहाँ तक की मसान जोकि काफी
नयी फिल्म है और विक्की कौशल जैसे अभिनेता गंगा नदी पर अंतिम संस्कार करने वाले का अभिनय करते नज़र आ
रहे हैं ।

आपके लिए गंगा के क्या मायने क्या अर्थ है ?

लाखों लोग गंगा नदी पर रोज़ स्नान करते हैं और गंगा का पानी पीते हैं ये गंगा जैसी महानदी का प्रयोग नहीं बल्कि
जशन है इसीलिए हमने इस मजमे का नाम भी जशनेगांगा दिया है । जिस तरह त्यौहारों पर घरों की सफाई की
जाती है अगर गंगा नदी का त्यौहार रोज़ मनाया जाता है तो इसकी सफाई भी रोज़ होनी आवश्यक है ।

गंगा नदी के इर्द गिर्द कोई कहानी जो आप साझा करना चाहें ?

मजमे में आइये कहानी क्या खूब सारा संगीतमय मज़ा भी लूटकर जाइएगा ।
दिल्ली में यमुना नदी की हालत भी काफी ख़राब है। यहाँ तक कि यमुना को नदी की जगह नाला भी कहा जाता रहा

है। क्या आप यमुना नदी पर भी एक उम्दा जानदार मजमा लगाना चाहेंगे ?

क्यों नहीं ? लोग यमुना नदी किनारे अपने जन्मदिन, अपनी सालगिरह और पिकनिक मनाना शुरू कर दें। यमुना
नदी पर नावें चलनी शुरू हो जाएँ तो देखिये क्या नज़ारे होंगे। अगर हम शहर के नागरिक अपनी नदियों की सुरक्षा
और रख रखाव की ज़िम्मेद्दारी अपने हाथों में ले लें तो सरकारें ख़ुदबख़ुद ज़रूरी क़दम उठाना चालू कर देंगी जिससे
नदियां नदियों की तरह देखी जाएँ नाकि नालों की तरह ।

क्या आपको लगता है कि गंगा नदी सचमुच साफ़ की जा सकती है ?

इसीलिए तो मैं यहाँ इस मेले में जशनेगँगा का मजमा लगा रहा हूँ । गंगा नदी पूरी तरह से गन्दी नहीं है।  केवल कुछ हिस्सों में गन्दी है ।  

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