‘घर में नहीं खाने को, अम्मा चली भुनाने को’

(युगल किशोर जालान)
वाराणसी। जनपद में कुटीर, सूक्ष्म और लघु उत्पादन इकाइयों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो चुकी है। रोजमर्रा के इस्तेमाल के जरूरी सामानों के अलावा गैर जरूरी सामानों के व्यापारी इस समय घोर आर्थिक संकट में उलझ चुके हैं। इस शहर के परम्परागत कंफेक्शनरी और आइसक्रीम इकाइयों में तो पूरी तरह लाकडाउन है लेकिन बेकरी में कुछ उत्पादन हो रहा है। संकट के इस दौर में ‘कोई भूखा ना सोये’ अभियान में जुडने से उद्योग-व्यापार जगत के कुछ लोग आर्थिक संकट में उलझ चुके हैं। फिर भी लोकलाज वश भोजन-अनाज सेवा से खुद को पीछे नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे ही सहृदय लोगों के लिए कहावत है- ‘घर में नहीं खाने को, अम्मा चली भुनाने को’।
इस समय प्रशासन स्तर पर चल रही भोजन पैकेट वितरण सेवा में नब्बे फीसदी से भी अधिक योगदान फिलहाल बेरोजगार बैठे उद्यमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं का ही है। यह दावा व्यापार जगत का नहीं है। प्रशासन स्तर पर जारी कोरोना संबंधित सूचनाओ में ही बताया गया है कि वाराणसी जनपद में दो सरकारी कम्युनिटी किचन के साथ-साथ 68 स्वैच्छिक संस्थाओं सहित कुल 70 किचन संचालित किया जा रहा है। इस प्रकार सरकारी कम्युनिटी किचन से 950 तथा स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित किचन से 14220 सहित कुल 15170 पैकेट पका पकाया भोजन सुबह और 15170 पैकेट शाम को तैयार कर लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार वाराणसी जनपद में प्रतिदिवस 30340 पैकेट भोजन रोजाना जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें सरकारी कम्युनिटी किचेन का योगदान मात्र 1900 पैकेट भोजन का है। ये वो गिनती है जो स्वैच्छिक संस्थाएं प्रशासन को वितरण के लिए उपलब्ध करा रहीं हैं। इसके अलावा भी 10-15 से 300 पैकेट तक व्यक्तिगत तौर पर भोजन पैकेट वितरित करने वालों की भी संख्या कम नहीं है। इस समय भोजन पैकेट वितरित करने में सेवारत शरद अरोड़ा, सुखविंदर सिंह, यदु देव अग्रवाल, निधिदेव अग्रवाल, प्रियंका सिंह, उमेश मिश्रा, अनिता शर्मा, अशोक गुप्ता, देव मनोज अग्रवाल, अजीत सिंह बग्गा जैसे तमाम लोग प्रशासन की सूची से अलग हटकर भी भोजन पैकेट वितरित कर रहे हैं। वाराणसी मंडल के आयुक्त श्री दीपक अग्रवाल के अनुसार मंडल के जनपदों में लॉक डाउन के दौरान असहाय, निराश्रित एवं जरूरतमंदो को रोजाना भोजन के लगभग एक लाख पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 40 सरकारी कम्युनिटी किचन के साथ-साथ 111 स्वैच्छिक संस्थाओं सहित कुल 151 किचन संचालित किये जा रहे है। चंदौली जनपद में 18222 पैकेट भोजन रोजाना जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
कुछ लोग मिडिल क्लास के परिवारों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं। जालान व्यापार समूह के मुखिया केशव जालान और महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने मिडिल क्लास पर ध्यान केन्द्रित कर रखा है। उद्यमी कुलवंत सिंह बग्गा ने बताया कि अनेक ऐसे लोग हैं, जिनके परिवार लाकडाउन से गंभीर समस्या में है परन्तु लोकलाजवश किसी से कुछ कह नहीं पा रहे। ऐसे लोगों का पता कर सहयोग किया जा रहा है। कुछ ऐसी ही जानकारी विभिन्न व्यापारियों ने दी है। सबसे पहले पीएनयू क्लब ने इस ओर ध्यान दिया था। केशव जालान ने भी अपनी सोशल वर्क टीम से कहा कि ऐसे लोगों की जानकारी प्राप्त कर उनके घरों में अकेले जाकर डिलीवरी मैन की तरह जरूरत की आवश्यक चीजों को पहुंचाये।

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